Har Gobind Khorana biography in Hindi – डॉ हरगोविंद खुराना की जीवनी

Har Gobind Khorana: दोस्तों टॉपहंट ब्लॉग पर visit देने के लिए बहूत बहूत धन्यवाद. 9 जनवरी 2018 के दिन google ने डॉ हरगोविंद खुराना (Dr. Har Gobind Khorana) इस महान वैज्ञानिक के 96 वें जन्मदिन को ख़ास doodle बनाया है. आज हम जानेंगे की डॉ हरगोविंद खुराना (Dr. Har Gobind Khorana) कोन थे? उनका कार्य क्या है?. उनकी पूरी जानकारी हम Har Gobind Khorana biography in Hindi – डॉ हरगोविंद खुराना की जीवनी इस लेख में जानेंगे.

Google Doodle Celebrate Har Gobind Khorana’s 96th Birthday

मित्रों हम सबको मालूम है की google हमेशा doodle में कलाकार, वैज्ञानिक और महान व्यक्तियों को मानवंदना देता है. Google की तरफ से  उनके कार्य को समाज के सामने रखने का काम doodle के माध्यम से किया जाता है. 9 जनवरी 2018 को Har Gobind Khorana इस वैज्ञानिक के 96 वें जन्मदिन पर बनाये गए doodle में research lab में Har Gobind Khorana खोज करते हुए दिखाए है.

Har Gobind Khorana

Har Gobind Khorana biography in Hindi – डॉ हरगोविंद खुराना की जीवनी

Har Gobind Khorana का जन्म 9 जनवरी 1922 को अखंड भारत के रायपुर (जिला मुल्तान, पंजाब) में हुआ था. उनके पिता पटवारी थे. हरगोविंद चार पुत्रों में सबसे छोटे और प्रतिभावान थे. घर के आर्थिक हालात ठीक न होने के बावजूद उनके पिता ने बच्चों की शिक्षा पूरी करने पर जोर दिया था. Har Gobind Khorana जब 12 साल के थे तभी उनके पिता का देहांत हुआ था. उसके बाद उनके सबसे बड़े भाई ने सब भाइयों की शिक्षा पूरी करने की जिम्मेदारी उठाई थी. Har Gobind बचपन से genius होने के कारण उन्हें पढ़ाई करने के लिए Scholarships मिलती गयी और वो आगे पढाई में बढ़ते रहे.  पंजाब विश्वविद्यालय से 1943 में B.Sc बाद में 1945 में M.Sc में ये उत्तीर्ण हुए और भारत सरकार से Scholarship पाकर अगली पढ़ाई और रिसर्च करने के लिए इंग्लैंड गए.

High Education के बावजूद Har Gobind Khorana को उनके योग्य काम नहीं मिला इसीलिए वो 1949 में इंग्लैंड में वापस जाकर 1952 तक कैंब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ाने का काम किया. बाद में उन्होंने 1952 में कनाडा के कोलंबिया विश्विद्यालय को join किया और वही Biochemistry विभाग के अध्यक्ष बन गए. 1960 में उन्हें professor institute of public service की तरफ से gold medal देकर सम्मानित किया गया. 1966 में Har Gobind Khorana अमेरिका के नागरिक बन गए. 1970 में उन्होंने Massachusetts Institute of Technology में Chemistry और Biochemistry professor हुए तब से 2007 तक हरगोविंद वही पर रहे और अध्ययन किया. डॉ हरगोविंद खुराना ने बायो टेक्नोलॉजी इस विषय की नीव रख राखी. जेनेटिक कोड की भाषा और प्रोटीन संश्लेषण  शोध और कार्य के लिए 1968 में नोबल पुरस्कार मिला.

1952 में उन्होंने एस्थर एलिजाबेथ सिब्लर के लड़की से शादी की और उन्हें 3 बच्चे हुए. उनके पत्नी ने उन्हें शोध और अध्ययन के कार्य में पूरा सहयोग दिया. एलिजाबेथ सिब्लर की मृत्यू 2001 में हुई और Har Gobind Khorana इस महँ वैज्ञानिक की मृत्यू 9 नवंबर 2011 को अमेरिका में हुई.

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