Mirza Ghalib Biography in Urdu/Hindi – गूगल के डूडल में आज मिर्जा ग़ालिब

Mirza Ghalib Biography in Urdu/Hindi: 27 दिसंबर 2017 के दिन google पर आपको Mirza Ghalib का doodle दिखाई देगा. हर बार google प्रसिद्ध कलाकार और वैज्ञानिक को याद करने के लिए और उन्हें मानवंदना देने के लिए doodle बनाता है. बुधवार के दिन भी महान शायर Mirza Ghalib को याद किया है. चलिए उनके बारे में Mirza Ghalib Biography in Urdu/Hindi इस लेख में विस्तार से जानते है.

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Google Doodle: Mirza Ghalib’s 220th Birthday

Mirza Ghalib Biography

Google हमेशा महान हस्तियों के जन्म दिन पर ख़ास doodle बनाकर उन्हें याद करता है. 27 दिसंबर के दिन भी google ने मिर्ज़ा ग़ालिब जी का doodle बनाया है. उस चित्र में श्याम के वक्त का सूरज दिखाया है, पीछे मुगलकालीन वास्तुकला का दर्शन कराया है और इस सुहाने मौसम में मिर्जा ग़ालिब हाथ में कलम और कागज लेकर खड़े शायरी लिख रहे है ऐसे दिखाया गया है, इसी बिच में उर्दू भाषा के शैली में google लिखा हुआ है. इस तरह से काफी सुन्दरता से कलाकार ने मिर्झा ग़ालिब का चित्र बनाया है.

Mirza Ghalib Biography in Urdu/Hindi

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Mirza Ghalib Biography – मिर्ज़ा ग़ालिब पूरा नाम मिर्ज़ा असद-उल्लाह बेग ख़ां था वो 18वीं सदी में भारत के उर्दू व फारसी भाषा के महान शायर थे. उनका जन्म 27 दिसंबर 1796 में भारत के आगरा में एक सैनिकी परिवार में हुआ था लेकिन असल में उनके पूर्वज तुर्की थे. मिर्ज़ा ग़ालिब के पिता का नाम मिर्ज़ा अब्दुल्ला बेग और माँ का नाम इज़्ज़त-उत-निसा बेगम था. जब ग़ालिब 5 साल के थे तभी उनके माता – पिता और चाचा का देहांत हुआ था. उन्होंने अपना बचपन चाचा की ब्रिटिश सरकार से मिलने वाले पेंशन पर बिताया था. ग़ालिब का निकाह उमराव बेगम से हो गया था. उसके बाद वो दिल्ली आये और वहापर अपनी ज्यादातर जिंदगी बिताई थी.

ग़ालिब ने बचपन में ही फारसी सिख ली थी और वो 11 साल की उम्र से ही उर्दू और फारसी भाषा में गद्य और पद्य लिखने की शुरुवात की थी. उनके पुरे गद्य और पद्य में त्रासदी से भरी जिंदगी की झलक दिखाई देती है. जैसे की मुघलों के हाथ से शासन जाना, अपने सात बच्चों को खोना और कम उम्र में ही अनाथ होना. ये सब दुख उनके लिखे कविताओं में साफ साफ दिखता है. मिर्ज़ा ग़ालिब में अपने जीवन में आर्थिक रूप से बड़ा संघर्ष किया, उन्हें कभी भी नियमित रूप से वतन नहीं मिला था. इन कठनाइयों में भी वो जिंदगी में डेटे रहे और बुद्धि और प्यार के साथ जीवन की परिस्थितियों को मोड दिया. उनके लिखे शायरी और कविताएँ काफी लोकप्रिय थी लेकिन ग़ालिब को उतनी सराहना नहीं मिली जितनी उन्हें मिलनी चाहिए थी. मिर्ज़ा ग़ालिब की मृत्यु दिल्ली में 15 फरवरी, 1869 को हुई थी.

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Ajinkya S

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